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Showing posts from January, 2018

कट्टरवाद का तोड़ कट्टरवाद तो नहीं !

कट्टरवाद का तोड़ कट्टरवाद तो नहीं ! आज की दुनिया के सामने जो दो बड़े संकट - अपराधीकरण और लूट जिसमें सभ्य समाज के बड़े बड़े लोग तल्लीन हैं बताया पर मैं यह भी समझता हूँ कि आधी से अधिक दुनिया मुस्लिम आतंकवाद और कट्टरवाद को ही दुनिया के सामने सब से बड़ा खतरा समझती है ! मुस्लिम आतंकवाद और कट्टरवाद का तोड़ जवाबी आतंकवाद और कट्टरवाद नहीं बल्कि तर्क , विज्ञान और मानवतावाद है - Truth और Good से ही मुस्लिम आतंकवाद और कट्टरवाद को परास्त किया जा सकता है ! भारत में विकृत मानसिकता वाले लोगों ने जो संघ बनाया वह अपने ही देश में आतंकवादी हमले करवाने लगा ताकि आम जनता मुसलामानों से घृणा करे और अनेकों निर्दोष मुस्लिम युवा को जेलों में डाल दिया गया और कुछ का fake encounter भी कराया गया - जब गुजरात छोड़ कर हर जगह और केंद्र पर कांग्रेस शासन था या प्रदेश में सपा या बसपा शासन था I संघ सफल रहा और आज भाजपा सत्तारुढ़ है - जबकि 1950 से आम शिक्षित हिन्दू जन संघ को नकार चुका था और कांग्रेसी या कम्युनिस्ट था I आज जो भी समस्या है - राम मंदिर, आरक्षण, EVM, FDI, GST, Aadhaar और जनता के पैसों से खिलवाड़ और पूंजीपतिय...

आज की दुनिया के दो भयानक सच - कब तक आप गफलत में रहेंगे ? ... (2)

आज की दुनिया के दो भयानक सच - कब तक आप गफलत में रहेंगे ?   ... (2) जैसाकि पिछले लेख   में मैंने कहा था हम सब Homo sapiens अपने इतिहास के पिछले 10000 वर्षों में सभ्य होते गए विकसित होते गए -   भाषा का विकास हुआ, समाज बना और देश बने - देश चलाने के लिए प्रजातंत्र स्थापित किया गया लेकिन अब पिछले कुछ दशक से मानव सभ्यता के सामने दो बड़े संकट उभर कर आये हैं I पहला संकट मैंने अपराधियों का हर देश में हर क्षेत्र में उभर कर ऊपर आना और अपराध का भूमंडलीकरण और अंतरराष्ट्रीयकरण हो जाना है और दूसरा बड़ा संकट जिसका मैं वर्णन करने जा रहा हूँ 'निरंतर चौबीसों घंटे चलने वाली लूट' है I पहली लूट है धरती के गर्भ में उपस्थित मिनरलों की लूट - जैसे कि दुनिया भर में इस समय सब से बड़ा उद्योग व्यापार मोबाइल का है - मोबाइल निर्माण में कई प्रकार के मिनरल प्रयोग में आते हैं जो अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में पाए जाते हैं - इसीलिए इन दो बड़े भूभाग में संसार में प्रजातंत्र और मानव अधिकारों की रक्षक महाशक्तियों ने छोटे छोटे देश बना कर वहाँ तानाशाही स्थापित कर रखी हैं और मल्टीनेशनल कम्पनियाँ संगीन की नोको...

आज की दुनिया के दो भयानक सच - कब तक आप गफलत में रहेंगे ? ... (1)

आज की दुनिया के दो भयानक सच - कब तक आप गफलत में रहेंगे ?   ... (1) हम सब Homo sapiens अपने इतिहास के पिछले 10000 वर्षों में सभ्य होते गए विकसित होते गए -   भाषा का विकास हुआ, समाज बना और देश बने - देश चलाने के लिए प्रजातंत्र स्थापित किया गया लेकिन अब पिछले कुछ दशक से मानव सभ्यता के सामने दो बड़े संकट उभर कर आये हैं I पहला संकट है लगभग सभी देशों में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का ऊपर आ जाना - शासन, प्रशासन, न्यायपालिका,पुलिस, मीडिया और प्रोफेशन में I यह अपराधी प्रवृत्ति के लोग संख्या में अभी कम हैं पर आपस में एक दूसरे की मदद करते हैं इसलिए न पकड़े जा सकते हैं और न दण्डित किये जा सकते हैं बल्कि अगर कोई इनके विरुद्ध खड़ा हो तो उलटे उसे ही फंसाया जा सकता है या ख़त्म कराया जा सकता है I इसी के साथ अपराधों का भी भूमंडलीकरण और अंतरराष्ट्रीयकरण हो गया है : 1 नारकोटिक्स 2 स्मगलिंग 3 पोर्नोग्राफी 4 मानव श्रम की तस्करी 5 औरतों बच्चों की तस्करी इन अपराधों में विभिन्न देशों की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले लोगों, कस्टम के लोगों और एयरलाइन्स के स्टाफ में जो अपराधी प्रवृत्ति क...

ईमान (आस्था) या नेक अमल (सत्कर्म) ?

ईमान (आस्था) या नेक अमल (सत्कर्म) ? हर धर्म संस्थापक और समाज सुधारक का एक ही उद्देश्य होता है कि   लोग बदी (दुष्कर्म) के रास्ते से बचें और नेकी (सत्कर्म) के रास्ते पर चलें I इस उद्देश्य से ईश्वर, परलोक , स्वर्ग और नर्क की धारणा का उपयोग किया गया I यहाँ तक तो बात सही थी लेकिन यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों में धर्मगुरुओं ने कर्म के बजाये आस्था को अधिक महत्त्वपूर्ण बताया और नास्तिक होना या अधर्मी होना या अलग पंथ हेरेसी को सब से बड़ा गुनाह माना और न जाने कितने सच्चे और आध्यात्मिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया - यूरोप में मध्य काल में हज़ारों लाखों स्त्री पुरुषों को मार डाला गया I जब मुंह से ईमान कहना ही काफी हो गया तो ऐसे लोग जो मुंह से तो मानते थे पर दिल से नहीं मानते थे वे इस्लाम में शामिल हो गए क़ुरान में इन्हें ही मुनाफ़िक़ कहा गया और वास्तव में ऐसे ही लोगों का इस्लाम पर क़ब्ज़ा हो गया और इन्हीं लोगों ने आम इंसानों मानसिक रूप से परतंत्र करने और औरतों को परदे में क़ैद कर के सिर्फ निकाह और तलाक़ की वस्तु बना दिया I आज से 1400 वर्ष पूर्व तो भले ही ईमान की बात कुछ कारगर रही हो आज...