ईमान (आस्था) या नेक अमल (सत्कर्म) ?



ईमान (आस्था) या नेक अमल (सत्कर्म) ?
हर धर्म संस्थापक और समाज सुधारक का एक ही उद्देश्य होता है कि  लोग बदी (दुष्कर्म) के रास्ते से बचें और नेकी (सत्कर्म) के रास्ते पर चलें I
इस उद्देश्य से ईश्वर, परलोक , स्वर्ग और नर्क की धारणा का उपयोग किया गया I
यहाँ तक तो बात सही थी लेकिन यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों में धर्मगुरुओं ने कर्म के बजाये आस्था को अधिक महत्त्वपूर्ण बताया और नास्तिक होना या अधर्मी होना या अलग पंथ हेरेसी को सब से बड़ा गुनाह माना और न जाने कितने सच्चे और आध्यात्मिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया - यूरोप में मध्य काल में हज़ारों लाखों स्त्री पुरुषों को मार डाला गया I
जब मुंह से ईमान कहना ही काफी हो गया तो ऐसे लोग जो मुंह से तो मानते थे पर दिल से नहीं मानते थे वे इस्लाम में शामिल हो गए क़ुरान में इन्हें ही मुनाफ़िक़ कहा गया और वास्तव में ऐसे ही लोगों का इस्लाम पर क़ब्ज़ा हो गया और इन्हीं लोगों ने आम इंसानों मानसिक रूप से परतंत्र करने और औरतों को परदे में क़ैद कर के सिर्फ निकाह और तलाक़ की वस्तु बना दिया I
आज से 1400 वर्ष पूर्व तो भले ही ईमान की बात कुछ कारगर रही हो आज 21वीं शताब्दी में मुंह से ईमान या आस्था की बात सुन कर या न सुन कर किसी इंसान को अच्छा या बुरा समझना और उसके कर्मों को न देखना मानव बुद्धि और विवेक का अपमान है !
अभी पाकिस्तान में एक 7 वर्षीय लड़की यौन हिंसा का शिकार बना कर मार डाली गयी और पुलिस निकम्मी बनी बैठी रही - और फेसबुक पर एक पोस्ट देखी - मुहम्मद स० ने कहा था अपने बच्चों के बाज़ू पर सूरह बलद लिख कर बाँध दो वे महफूज़ रहेंगे !
माँ बाप अल्लाह के घर मक्के में काबा में उमरह कर रहे थे दुआएं मांग रहे थे और यहाँ पकिस्तान में उनकी बच्ची यौन हिंसा का शिकार हो रही थी क्योंकि माँ बाप चूक गए उन्होंने अपनी बच्ची के बाजू पर सूरह बलद लिख कर नहीं बाँधा था !
अरे बे अक़लों, उठो अपने मुल्क के मुजरिमों जो सत्ता में , शासन में , प्रशासन मेंम , पुलिस में , न्यायालयों में , मीडिया में और जमाते इस्लामी में बैठे हैं उन्हें गिरफ्तार करो और जेल भेजो !
यही ज़रुरत है भारत में और दुनिया के हर देश में - सत्कर्म करने वालों खड़े हो और दुष्कर्म करने वालों को गिरफ्तार करो जेलों में बंद करो !       

   
ASTHA - Association of Social Thinkers and Activists - आप manesiro@gmail.com पर ई मेल करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण Year Book 2018 का ड्राफ्ट प्रेषित किया जाएगा - आप अपने बहुमूल्य विचार इसमें अंत में अंकित कर मुझे पुनर्प्रेषित करें - सभी के विचार संकलित कर के  वर्ष 2018 जनवरी मास के अंत तक इस पुस्तक को प्रकाशित किया जाएगा I इस प्रकार वर्ष प्रति वर्ष यह क्रम चलता रहेगा I
ASTHA एक ऑनलाइन संगठन है जो नि:शुल्क  है और कभी कोई फीस नहीं लेगा - सिर्फ सत्य और ज्ञान की शक्ति से आम नागरिकों को जागृत कर के देश और दुनिया बदल देगा - आप केवल ईमेल द्वारा जुड़े रहें और अपनों को जोड़ें I इन विचारों को समझें  और आगे बढ़ाएं - इन पोस्टों को शेयर करें I

Comments

Popular posts from this blog

परिवार में अपराधी

भाजपा, अगर हुकूमत करनी है तो मुगलों से सीखो अंग्रेजों से सीखो !

ट्रम्प व मोदी का मुस्लिम द्वेष और सच्चा इस्लाम