ट्रम्प व मोदी का मुस्लिम द्वेष और सच्चा इस्लाम
21वीं शताब्दी में हम आज इस मक़ाम पर आ गए हैं कि विश्व के दो सब से बड़े प्रजातंत्र देशों में चुनाव जीत
कर वही दो लोग - डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका में राष्ट्रपति और नरेंद्र मोदी भारत में
प्रधानमन्त्री बने हैं जिनकी पहचान मुस्लिम दुश्मनी के रूप में हैं और इनके समर्थक
वे लोग हैं जो इन्हें जिताने के लिए बड़ी से बड़ी धांधली भी कर सकते हैं और सोशल
मीडिया पर इनके विरुद्ध लिखने वालों को हतोत्साहित करने और अपमानित करने में कोई
कसर भी नहीं छोड़ते हैं I
यह मुस्लिम दुश्मनी क्या है और क्यों है ? दुनिया यहूदियों से भी नफरत करती है
और इस नफरत की इंतिहा उस ज़ुल्म के रूप में नाज़ी जर्मनी में हुयी जिसे होलोकॉस्ट
कहा जाता है और जिसको देख कर पूरी दुनिया स्तब्ध हो गयी और आज भी ताज्जुब करती है
कि क्या इंसान इतना भी ज़ालिम हो सकता है !
आज भी कुछ वैसा ही मुस्लिम दुश्मन लोग ट्रम्प और मोदी से उम्मीद लगाए बैठे हैं
- अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग ! मेरे सहपाठी ने व्हाट्स ऐप्प ग्रुप में एक कविता लिखी
थी मोदी के नाम - 'जैसा गुजरात में किया एक बार पूरे भारत में करा दो !'
जैसा कहा जाता है कि ईश्वर गेंहू को पीस कर आटे से चोकर को अलग करता है वही
बात शायद होती है - एक तरफ झूठा मुसलमान है जो तौहीद ( एकेश्वरवाद ) को ले कर अपने
मत से अलग मुसलामानों को मार रहा है उन पर ज़ुल्म कर रहा है उनकी ज़िन्दगी जहन्नम
बना रहा है - कोई इंसान नास्तिक हो तो तुम से क्या ? कोई आदमी किसी और को रसूल
माने तो तुम से क्या ? पर सारे मुस्लिम विश्व में कादियानियों और बहाइयों पर ज़ुल्म
हो रहे हैं और इन्हें काफिर मुशरिक घोषित कर रखा है I सुन्नी देशों में शियों पर ज़ुल्म हो रहे हैं -
पाकिस्तान और नाइजीरिया में - शियों को भी काफिर कहा जा रहा है I
यही झूठे मुसलमान दुनिया भर में दाढ़ी और परदे को इस्लाम बनाए हुए हैं - कोई
औरत बिना महरम पुरुष ( बाप, भाई , बेटा ) या पति को साथ लिए घर के बाहर नहीं
निकल सकती I यही झूठे मुसलमान दूसरे मुल्कों में अपने धर्म का जोरशोर से प्रदर्शन
करते हैं जबकि मुस्लिम देशों में ऐसा कुछ नहीं है और दूसरे मत के मुसलामानों और
दूसरे धर्मों के लोगों को तो कोई अधिकार ही नहीं है I
ज़रुरत है कि हर देश में यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स लागू किये जाएँ
-मुस्लिम देशों में भी I
और जहां लोग एक बंद समाज बना कर जीवन जीना चाहते हैं तो वहाँ भी हर नगर में
अलग कॉलोनी हों जहां जिसकी जो भी धार्मिक मान्यता हो और जो भी सेक्स ओरिएंटेशन हो
बिना बाधा अपना जीवन जी सके - एल०जी०बी०टी०, नास्तिक , कादियानी , बहाई , और सभी
धर्मों मतों के लोग अपना जीवन जी सकें I
जब मुस्लिम और मुस्लिम देश इतने खुले दिमाग के हो जायेंगे तब दुनिया के बाकी
लोगों के मन से इस्लाम और मुसलामानों के प्रति नफरत दूर हो सकेगी I
सच्चा इस्लाम इससे भी अलग है और इसका रास्ता इसकी मंजिल वही है जो सारे धर्मों
की मंजिल है -
सारे इंसान हमारे अपने हैं - सारे जीव वनस्पति हमारे अपने हैं - ज़मीन आसमान
सारी कुदरत सारी ख़ुदाई हमारे अपनी है - हर तरफ उसका जलवा है - वह मालिक है रब है
हम उसके बन्दे नचीज़ हैं - ऐ रब तेरी याद में हम डूबे रहें हर एक के साथ नेकी और
मुहब्बत करते रहें - तू ही सब से ज्यादा नेक और सब से ज्यादा मुहब्बत करने वाला है
!
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