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ग्लोबल नाम : आइये सम्प्रदायिकता और जातिवाद को शिकस्त दें !

ग्लोबल नाम : आइये सम्प्रदायिकता और जातिवाद को शिकस्त दें ! हमारी सम्प्रदायिक और जातिवादी पहचान हमारे नाम से होती है - इसके इलावा हम सब एक जैसे हैं इसलिए नए युग में ज़रुरत है नए नामों की और अपने नाम में बस थोड़ा सा परिवर्तन कर के हम ग्लोबल नाम पा सकते हैं और World Citizen बन सकते हैं I अपना मुख्य नाम लीजिये और दूसरा नाम अपनी माँ का लीजिये और तीसरा नाम अपने पिता का लीजिये - मान लीजिये किसी का नाम अरविन्द है और उसकी माँ का नाम शकुंतला है और पिता का नाम गोपाल है : Arvind Shakuntala Gopal अब इस नाम में प्रत्येक नाम से vowels हटा दीजिये : rvnd shkntl gpl अब पुन: a e i o u के क्रम में vowels लगा दीजिये : Arevinodu Shakenitolu Gapel इस तरह अक अनोखा नाम बन गया जिससे भाई बहेन भी पहचाने जा सकते हैं क्योंकि उनका दूसरा तीसरा नाम एक सा होगा I सामाजिक पुनर्निर्माण में अपना योगदान देने के के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://publish.pothi.com/preview/?sku=ebook6614 Association of Social Thinkers and Activists - आप manesiro@gmail.com पर ई मेल करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण...

चलो एक बार फिर से बन जाएँ बस इंसान !

चलो एक बार फिर से बन जाएँ बस इंसान ! धरती पर मानव इतिहास का आरम्भ लगभग 2 लाख वर्ष का है - लगभग तीन लाख वर्ष पूर्व पाए गए नारी कंकाल 'लूसी' से हम सब होमो सेपियन्स (आज के इंसान) जेनेटिकली लिंक्ड हैं I मानव सभ्यता का आरंभ लगभग दस हज़ार वर्ष पूर्व हुआ था जब कृषि का विकास हुआ और भाषा और लिपि के विकास के बाद फिर निरंतर विकसित होते गए हम I जब नगर बने और राज्य बने और साम्राज्य बने तब मानव समाज में अन्याय और अत्याचार का भी आरम्भ हुआ लोगों को जातियों में बाँट दिया गया - ऐसे में जहां भारत में बुद्ध और महावीर ने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया बिना परलोक की बात किये वहीँ मिडिल ईस्ट में मिस्र में   अपने लोगों को फिरौंन कि दासता से मुक्त करने के लिए YHWH के आदेश की ज़रुरत पड़ी और इसके बाद रोमन साम्राज्य में आसमानी बाप की ज़रुरत पड़ी और इसके बाद अल्लाह के कलाम की ज़रुरत पड़ी I दुनिया का इतिहास यहूदियों ईसाइयों और मुसलामानों के ज़ुल्म से तो भरा ही था अब बात यहाँ तक पहुंची कि बुद्ध को मानने वाले लोग म्यांमार में बेक़सूर रोहिंग्या मुसलामानों की नस्ल का सफाया कर रहे हैं - कल ही रयूटर ने एक रिपोर्ट...

व्यस्क सम्बन्ध : किसी और को क्या लेना देना ?

व्यस्क सम्बन्ध : किसी और को क्या लेना देना ? कोई दो व्यस्क आपस में चाहे जो सम्बन्ध रखें - शारीरिक समलैंगिक या विषम लैंगिक या कोई व्यस्क ट्रांसजेंडर हो तो इससे कानून को क्या सरोकार ? कानून का काम तो केवल बलात्कार, हिंसा और पेडोफिलिया के मामलों में आता है और इन अपराधों को करने वाले लोग अवश्य दण्डित किये जाने चाहिए I सुनने में तो यह आता है कि हिंसा और बलात्कार के अपराधी चुनाव भी जीत जाते हैं और मंत्री भी बन जाते हैं और सरकार और अदालतें समलैंगिक व्यस्क संबंधों में हस्तक्षेप करना चाहते हैं I व्यस्क सम्बन्ध केवल शारीरिक नहीं होते - भावनात्मक और स्पिरिचुअल भी हो सकते हैं I बात केवल तब आती है जब वे पहले से विवाहित हैं एक या दोनों के मैरिज पार्टनर कोई दूसरे हैं - तब अवश्य एक समस्या है और दम्पति में एक दूसरे को धोखा दे या दोनों एक दूसरे को धोखा दे रहे हैं तो यहाँ बात खुलने पर उनके सामने तलाक़ का रास्ता है या फिर देखना है ज़िन्दगी क्या गुल खिलाती है - पर कानून का रोल तलाक़ की अर्ज़ी के पहले नहीं है I   व्यस्क सम्बन्ध विवाह के अंतर्गत हों या उससे परे पर आपस में वे क्या करते हैं - जेनाई...

स्वैछिक विवाह : नए भारत के निर्माण के लिए अनिवार्य

स्वैछिक विवाह : नए भारत के निर्माण के लिए अनिवार्य जब लड़के लड़कियां अपना जीवन साथी स्वयं चुनते हैं और ऐसा करने में सम्प्रदाय और जाति की दीवारों को लांघ कर जाते हैं तो यह देश, समाज और प्रकृति के पूर्णत: अनुकूल है I भावी संतान अधिक स्वस्थ और बुद्धिमान होगी जिसके माता पिता अलग अलग जेनेटिक पूल के हैं - एक ही पूल में विवाह होने के कारण कमज़ोर जीन उभर आते हैं और संतानें शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ और कमज़ोर होती हैं I स्वैच्छिक विवाह करने वाले लड़के लड़कियां प्रकृति के नियमों का पालन कर रहे हैं - एक लड़का अपने आस पास रहने वाली या साथ पढ़ने वाली या साथ काम करने वाली या संयोग से ऐसे ही दिखने वाली लड़की के बाल, आँखों, होंट , गाल के गड्ढे उसके लिए इतने मोहक हो जाते हैं कि उस लड़की को पाना चाहता है अपना जीवन साथी बनाना चाहता और फिर सारे डर हिचक को परे कर के किसी तरह अपनी बात टूटी फूटी भाषा में लड़की से कह ही देता है - लड़की को बहुत गुस्सा आता है या वह बहुत डर जाती है - पर धीरे धीरे सम्मोहन असर कर जाता है और मिलना जुलना शुरू हो जाता है I अब अगर उनके बीच दीवार खड़ी कर दी जाए - एक की शादी कही...