चलो एक बार फिर से बन जाएँ बस इंसान !
चलो एक बार फिर से बन जाएँ बस इंसान !
धरती पर मानव इतिहास का आरम्भ लगभग 2 लाख वर्ष
का है - लगभग तीन लाख वर्ष पूर्व पाए गए नारी कंकाल 'लूसी' से हम सब होमो सेपियन्स
(आज के इंसान) जेनेटिकली लिंक्ड हैं I मानव सभ्यता का आरंभ लगभग दस हज़ार वर्ष
पूर्व हुआ था जब कृषि का विकास हुआ और भाषा और लिपि के विकास के बाद फिर निरंतर
विकसित होते गए हम I
जब नगर बने और राज्य बने और साम्राज्य बने तब
मानव समाज में अन्याय और अत्याचार का भी आरम्भ हुआ लोगों को जातियों में बाँट दिया
गया - ऐसे में जहां भारत में बुद्ध और महावीर ने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया बिना
परलोक की बात किये वहीँ मिडिल ईस्ट में मिस्र में
अपने लोगों को फिरौंन कि दासता से मुक्त करने के लिए YHWH के आदेश की
ज़रुरत पड़ी और इसके बाद रोमन साम्राज्य में आसमानी बाप की ज़रुरत पड़ी और इसके बाद
अल्लाह के कलाम की ज़रुरत पड़ी I
दुनिया का इतिहास यहूदियों ईसाइयों और
मुसलामानों के ज़ुल्म से तो भरा ही था अब बात यहाँ तक पहुंची कि बुद्ध को मानने
वाले लोग म्यांमार में बेक़सूर रोहिंग्या मुसलामानों की नस्ल का सफाया कर रहे हैं -
कल ही रयूटर ने एक रिपोर्ट दी है तस्वीर भी है 10 रोहिंग्या मारे जाने का इंतज़ार
कर रहे हैं और उनके बौध पड़ौसी उनके दफन के लिए गड्ढा खोद रहे हैं !
ज़ुल्म यहाँ तक पहुँच गया है - बस एक पहचान दूसरी
पहचान की कातिल बन गयी है !
आइये हम पहचान छोड़ दें - बस होमो सेपियन्स -
World Citizen बन जाएँ - बस इंसान बन जाएँ
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