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आगे अँधेरा है - जागृति की ज़रुरत है

इस धोखे में जीवन न जीइयये कि अरबों खरबों वाले आप को और आपकी भावी पीढ़ियों को चैन से जीने देंगे ! पहले बात और थी जब 95 प्रतिशत लोग अपनी गरीबी में मस्त जीवन जी रहे थे और धर्म और अध्यात्म की छांव में जी रहे थे - आज का पूंजीपति उद्योगपति जो देशों के कानून से मुक्त मल्टीनेशनल कंपनियों का मालिक है और जिसके लिए जनता द्वारा चुनी सरकारें उस की रखैल बन जाती हैं - उसे आप का सब कुछ चाहिए                                   आप की ज़मीन वहाँ वह वह कारखाने लगाएगा जिनके प्रदूषण के कारण जिन्हें वह अपने देश में नहीं लगाएगा - आप की सरकार आप की ज़मीन खाली करा कर उसे मुफ्त ज़मीन देंगी, उसे मुफ्त बिजली देंगी या वह बिजली बिलों का भुगतान करेगा ही नहीं - आप के घरों से बिजली काट कर उसे बिजली दी जायेगी I अगर आप किसी छोटे देश में रहते हैं तो   जब तक यह नहीं मालूम है कि आप के भू भाग के नीचे तेल या मिनरल है तब तक आप रह लीजिये और प्रजातंत्र में रह ...

अरबों खरबों का रहस्य

कितनी ही बड़ी साज़िश रची जाए आप और हम धर्म और जाति में न बंटें - पूरी मानव जाति से जुड़ें- मानव क्या सभी जीवों से जुड़ें वनस्पति से जुड़ें - प्रकृति से जुड़ें - सम्पूर्ण से जुड़ें   उससे एकरस हों फिर सच्चा ज्ञान सच्चा दर्शन प्राप्त होगा और हम सिर्फ सत्कर्म ही करेंगे I न प्रदूषण होने दें और न प्राकृतिक संपदाओं की लूट होने दें I कौन बांटना चाहता है ? वे जिनकी आस्था अरबों खरबों पर है - यह अरबों खरबों मात्र झूठ हैं धोखा हैं - सम्पूर्ण मानव जाति से की गयी चोरी है ! अरबों खरबों का रहस्य क्या है ? ये वे सड़क हैं जो बनायी नहीं गयीं और जो बनायी गयीं वे ठीक से बनायी नहीं गयीं I ये वे बिजली की लाइन हैं जो पहुंचाई नहीं गयीं I ये वे पुल हैं जो बनाए नहीं गए I ये वे पीने के पानी का इंतज़ाम है जो किया नहीं गया I ये वे स्कूल हैं जो खोले नहीं गए I ये वे अस्पताल हैं जो खोले नहीं गए या चले नहीं या चल नहीं पा तहे हैं I ये वे रोज़गार हैं जो उपलब्ध नहीं कराये गए I ये वे आपदा राहत सामग्री है जो पहुंचाई नहीं गयी I ये आम लोगों का बैंकों और इन्शुरन्स में जमा पैसा है जिसका जब भुगतान होता है तो उसका मूल्य उस...

भयानक सच

चुनावी राजनीति से भ्रमित न होइए - अधिकाँश का उद्देश्य चुनाव जीतना और अपने और अपनों को करोड़ों अरबों खरबों कमवाना चाहते हैं - स्वयं अपराधी हैं अपराधियों की पुश्तपनाही करने वाले हैं I अपराधी वे हैं जिनकी आस्था करोड़ों अरबों खरबों पर है - जो झूठ है धोखा है उनके किसी काम नहीं आना है I मानव जीवन का लक्ष्य केवल सत्कर्म है ! अभी समय है - संगठित हो जाइए जागिये और जगाइए इसके पहले ये अपराधी अपनी सुरक्षा में रोबोट लगा लें और आम लोगों के मस्तिष्क को गुलाम बनाने की टेक्नोलॉजी विकसित कर लें I आम नागरिकों के धन उनके श्रम उनके यौन शोषण और उनके अंगों की लूट अब बहुत दूर नहीं है - जो गुलामों दलितों के साथ पहले कभी हुआ अब दुनिया के 95 प्रतिशत लोगों के साथ होने जा रहा है - धन सम्मान स्वतंत्रता न्याय सुरक्षा सब से वंचित - श्रम यौन शोषण और अंगों की लूट ! अपराधी स्वयम रोबोट द्वारा सुरक्षित और आम नागरिकों को मस्तिष्क प्रभावित करने वाली टेक्नोलॉजी से हमेशा के लिए आम नागरिकों को पीढ़ी दर पीढ़ी गुलाम बनाना ! पर अगर 95 प्रतिशत में से हम 10 प्रतिशत शिक्षित लोग एक जुट हो गए तो उनकी हर साज़िश और टेक्नोलॉजी को ...

एक नया विश्व

आज की दुनिया की वे भयानक खराबियां जो बढ़ती जा रही हैं और कुछ दशक पूर्व न के बराबर थीं ! इन खराबियों के आगे देश विदेश की सरकारें सिर्फ घुटने ही नहीं टेकें हैं बल्कि अनेक स्वयं शामिल भी हैं : 1 प्राकृतिक सम्पदा की लूट और बढ़ता प्रदूष्ण मल्टीनेशनल कंपनियां मुनाफैं की हवस में   एक तरफ लगातार चौबीसों घंटे मिनरल , तेल , वनों , सागरों, जीवों को लूट रहे हैं स्थानीय लोगों से जबरी मजदूरी भी करवा रहे हैं और अपने कारखाने ऐसी जगह लगवा रहे हैं जहां रहने वालों के जीवन और स्वास्थ्य को बहुत बड़ा खतरा खड़ा कर रहे हैं और इन सब कामों में शक्तिशाली देशों की सरकारें उनकी मददगार हैं और अगर कोई देश इनकार करे तो शक्तिशाली देश उस पर हमला कर दें या इनकार करने वाले शासक की हत्या करवा दें I औद्योगिक प्रतिष्ठानों से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है और वायु जल हर तरफ प्रदूषण बढ़ता जा रहा है I हमारे सिवा इसे कौन रोक सकता है ? दुनिया के कमज़ोर नागरिक एक जुट हो कर प्राकृतिक संपदाओं की लूट और प्रदूषण जनक उद्योगों को हमेशा के लिए ख़त्म कर सकते हैं I हम भारतवासी जो जानते हैं यह संसार यह जीवन कुछ नहीं है - पानी कर बुदबुदा ...