अरबों खरबों का रहस्य



कितनी ही बड़ी साज़िश रची जाए आप और हम धर्म और जाति में न बंटें - पूरी मानव जाति से जुड़ें- मानव क्या सभी जीवों से जुड़ें वनस्पति से जुड़ें - प्रकृति से जुड़ें - सम्पूर्ण से जुड़ें  उससे एकरस हों फिर सच्चा ज्ञान सच्चा दर्शन प्राप्त होगा और हम सिर्फ सत्कर्म ही करेंगे I न प्रदूषण होने दें और न प्राकृतिक संपदाओं की लूट होने दें I
कौन बांटना चाहता है ? वे जिनकी आस्था अरबों खरबों पर है - यह अरबों खरबों मात्र झूठ हैं धोखा हैं - सम्पूर्ण मानव जाति से की गयी चोरी है !
अरबों खरबों का रहस्य क्या है ?
ये वे सड़क हैं जो बनायी नहीं गयीं और जो बनायी गयीं वे ठीक से बनायी नहीं गयीं I ये वे बिजली की लाइन हैं जो पहुंचाई नहीं गयीं I ये वे पुल हैं जो बनाए नहीं गए I ये वे पीने के पानी का इंतज़ाम है जो किया नहीं गया I ये वे स्कूल हैं जो खोले नहीं गए I ये वे अस्पताल हैं जो खोले नहीं गए या चले नहीं या चल नहीं पा तहे हैं I ये वे रोज़गार हैं जो उपलब्ध नहीं कराये गए I ये वे आपदा राहत सामग्री है जो पहुंचाई नहीं गयी I ये आम लोगों का बैंकों और इन्शुरन्स में जमा पैसा है जिसका जब भुगतान होता है तो उसका मूल्य उस समय बहुत कम होता है और ये सारा पैसा उद्योगपतियों पूंजीपतियों को कर्जे में दिया जाता है और फिर कर्जा माफ़ कर दिया जाता है I ये वे ज़मीनें हैं जो पूंजीपतियों उद्योगपतियों को मुफ्त या कर्जे पर दी गयीं जिनका मूल्य अदा नहीं होगा I ये किसानों आदिवासियों से औने पौने छीनी गयी ज़मीनें हैं I ये वे खानें हैं जिन्हें जनता के पैसों से और जनता के श्रम से खोदा गया और खनन और विक्रय का अधिकार पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को दे दिया गया I ये वे सड़क पुल और रेलवे लाइन हैं जिन्हें जनता के पैसे और श्रम से बनाया गया पर उन पर ट्रांसपोर्ट सेवा का अधिकार पूंजीपतियों उद्योगपतियों को दिया गया I ये वे तेल के कुंए हैं जिन्हें जनता के धन श्रम से खोजा गया खोदा गया और तेल को  बेचने का अधिकार पूंजीपतियों उद्योगपतियों को दिया गया I ये वे टेलिकॉम सुविधा है जिसे जनता के धन श्रम से स्थापित किया गया और पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को एलोट कर दिया गया - जो जनता से और अधिक वसूलने के नित नए हथकंडे करते रहते हैं I
और ये पूंजीपति उद्योगपति न कर्जे अदा करते हैं और न बिजली का भुगतान करते हैं और न वाजिब टैक्स अदा करते हैं I
सत्ता के तीनों अंगों - विधायिका न्यायपालिका और कार्यपालिका में जो बैठेगा उसे खरीद लेते हैं जो नहीं बिकेगा उसकी सत्ता पलट सकते हैं और ज़रूरी हुआ तो उसकी हत्या करवा सकते हैं I
इसलिए दुनिया की सरकारों से कोई उम्मीद न रखिये - अमेरिका सरकार गन कण्ट्रोल नहीं कर सकती है और न ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों पर साइन कर सकती है ! और क्या सबूत चाहिए कि जनता द्वारा चुनी सरकारें पूंजीपतियों उद्योगपतियों की रखैल बन जाती हैं ? देश धर्म जाति के झूठ का त्याग करिए और दुनिया के अपराधों का नाश करिए अपराधियों को दण्डित कीजिये - सिर्फ हम  दुनिया के कमज़ोर नागरिक एक जुट हो कर ऐसा सकते हैं I हम भारतवासी जो जानते हैं यह संसार यह जीवन कुछ नहीं है - पानी कर बुदबुदा अस मानस की जात  और जो जानते हैं रुपया पैसा कुछ नहीं सिर्फ हाथों की मैल है - यही विश्व की अगुवाई कर के एक नए विश्व की रचना करेंगे I
हम  सभी शिक्षित स्त्री पुरुष एक मज़बूत संगठन बनाएं - मैंने इसका नाम सोचा है ASTHA - Association of Social Thinkers and Activists - आप manesiro@gmail.com पर ई मेल करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण Year Book 2017 का ड्राफ्ट प्रेषित किया जाएगा - आप अपने बहुमूल्य विचार इसमें अंत में अंकित कर मुझे पुनर्प्रेषित करें - सभी के विचार संकलित कर क्र वर्ष 2018 मार्च में इस पुस्तक को प्रकाशित किया जाएगा I
ASTHA एक ऑनलाइन संगठन है जो नि:शुल्क  है और कभी कोई फीस नहीं लेगा - सिर्फ सत्य और ज्ञान की शक्ति से आम नागरिकों को जागृत कर के देश और दुनिया बदल देगा - आप केवल ईमेल द्वारा जुड़े रहें और अपनों को जोड़ें I इन विचारों को समझें  और आगे बढ़ाएं

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