क्या लखनऊ के शियों में ज्यादा मौतें हो रही हैं ?



क्या लखनऊ के शियों में ज्यादा मौतें हो रही हैं ?
यही लग रहा है और कई लोगों को भी शायद यही लग रहा है - मौतों की ज्यादा ख़बरें आ रही हैं और शादी और बच्चों की पैदाइश की ख़बरें कम आ रही हैं I
नगर महापालिका के रिकार्ड्स देखने की ज़रुरत है लेकिन मान लें कि यह सच है तो इसकी क्या वजहें हो सकती हैं ?
मैं समझता हूँ इसकी वजह शियों में धर्मान्धता और उलेमा परस्ती है - यहूदियों में भी पहले यही सब था और हिन्दू सवर्ण में भी यही था I यहूदियों के कैलेंडर में तो शायद कोई खाली दिन बचा नहीं है जिस दिन कोई ख़ास इबादत और ख़ास पकवान न होता हो I इनके यहाँ तो ऐसे ऐसे रोग होते थे  जो बाक़ी मानव जाति में होते ही नहीं थे I
जिस ज़माने में मैं मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा था ब्रह्मणों के बच्चों को विशेष लीवर सिरोसिस होती थी - शायद तांबे के बर्तन में तांबे के चम्मच से बच्चों को देसी घी पिलाते थे या ऐसे ही कुछ करते थे - खैर यह रोग अब नहीं होता I
शियों में धर्मान्धता और निष्क्रिय धर्म बहुत बढ़ गया है - शादियों में बरात हो या वलीमा 11 बजे रात के पहले कुछ होता नहीं है I जब कोई मरता है तो उस दिन दफन मजलिस फिर तीजा और चालीसवें की मजलिस और फिर देसा और फिर हर साल उसका देसा और इसके अतिरिक्त भी ईसाले सवाब की मजलिस I 14 मासूमों की विलादत और 13 की शहादत इन सब को मनाया जाता है और इसके इलावा भी कुछ और लोग हैं जिनके प्रति श्रद्धा है उनका भी धीरे धीरे होने लगेगा I बात यह नहीं है कि इंसान ईश्वर या पैग़म्बर या अन्य लोगों से श्रद्धा रखे या न रखे - बात है निष्क्रियता की और बात है मौलाना या जाकिर की बात पर सिर्फ 'वाह वाह' करने की ! पतंग छत पर उड़ा रहे थे नमाज़ या मजलिस का टाइम आया पतंग वहीँ बाँध दी - मजलिस में जोर जोर से 'वाह वाह ' की और मजलिस ख़त्म होते ही फलांगते हुए छत पर पहुंचे और पतंग थाम ली !
पूरे ग्रुप में एक भी इंसान नहीं मिलेगा जिसके चेहरे पर इल्म व फ़िक्र के आसार हों सिवाए कुछ उलेमाओं के जो इल्म और फ़िक्र के रास्ते पर हैं !
अगर सच्चे दीनदार हो तो कुरान को बार बार मतलब समझ कर पढ़ो और इस क्रम में पढ़ो जिस क्रम में सूरे उतरे थे - मक्का में 86 और मदीने में 28 और उस वक़्त के हालात का अंदाजा करो और फिर पूरा इतिहास पढ़ो इस्लाम के आरम्भ से आज तक का I
असली चीज़ है अक्ल का इस्तेमाल और आज के ज्ञान विज्ञान को पढ़ना समझना और आगे बढ़ना !
एक सर्वव्यापी चेतना है जिस से सत्य और नेकी प्राप्त होती है लेकिन एक चेतना और है जिस से झूठ और बुराई प्राप्त होती है - धर्म और विज्ञान दोनों में दोनों चीजें हैं जैसे कि इन्टरनेट में दोनों चीजें हैं I
हमें थोड़ी आस्था और धर्म कर्म की ज़रुरत है पर इतनी भी नहीं कि रातों की नींद खराब करें और पति पत्नी नापाकी से बचने के डर से साथ सोयें भी न I इससे अच्छा है सुबह की नमाज़ छोड़ दें और सुबह नहा कर पढ़ लें  !
यही चीजें शियों को मार रही हैं :
1 सिर्फ थोड़ी आस्था और धर्म कर्म करो
2 किसी का न तो अंधानुसरण करो और न निष्क्रिय वाह वाही करो - पढ़ो और सोचो
3 ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़ो
4 रातों की नींद खराब न करो
5 शादी करो और कुदरत के साथ जियो - नापाकी के ख़याल से दूरी न करो !

Comments

Popular posts from this blog

परिवार में अपराधी

भाजपा, अगर हुकूमत करनी है तो मुगलों से सीखो अंग्रेजों से सीखो !

ट्रम्प व मोदी का मुस्लिम द्वेष और सच्चा इस्लाम