शिया सुन्नी इत्तेहाद का भ्रम !
शिया सुन्नी इत्तेहाद का भ्रम !
शिया सुन्नी सिर्फ इंसान हैं आपस में भाई हैं जैसे कि दुनिया के सभी इंसान भाई
हैं पर भ्रमित शिया हैं जो शिया सुन्नी इत्तेहाद की बात करते हैं और कल ईरान के
राष्ट्रपति आये थे उन्होंने इत्तेहाद की बात की और जुमे की नमाज़ एक सुन्नी इमाम के
पीछे पढ़ी और पहले कुछ भारत के शिया मौलवी ऐसी कोशिशें कर चुके हैं और अब ईरान की
शह पर और ज़ोरदार कोशिशें करेंगी और फिर पूरा भारत जहां जहां शिया हैं - शिया
सुन्नी दंगों का गढ़ बन जाएगा !
ज़ुल्म और दमन के रास्ते को इस्लाम को मानने वाले लोग ही ऐसा इत्तिहाद चाहते
हैं और ईरान भी किसी तरह ज़ालिम सऊदी हुकूमत से कम नहीं है - औरतें जिनां का इलज़ाम
लगा कर कत्ल की जा रही हैं और कुछ दिन पहले एक साइंटिस्ट को भी कत्ल किया गया और
ख़ामोशी से ज़ुल्म और दमन का चक्र चल रहा है और शायद कई मौलवी भी जेलों में हैं I
मुसलामानों को अहिंसा आजादी के रूप में इस्लाम को पहचानना होगा तभी दुनिया में
अमन हो पायेगा और इसके लिए इस्लाम का सही इत्तिहास समझना होगा I
अरब के कबायलियों और बद्दुओं को परलोक में दंड और इनाम बता कर सही रास्ते पर
लाने की कोशिश की गयी थी तो जब शुरू में मुसलामानों की छोटी सी फ़ौज दुश्मनों के
बड़े लश्कर से बदर और हुनैन में जीती तो सब के सब मोमिन हो गए - ख़ास कर जो बड़े बड़े
थे ! फिर जब उहद में करारी शिकस्त हुयी तो यह बड़े बड़े मुनाफ़िक़ हो गए और अपने रसूल
की वफात तक खामोश रहे और ईमान की नकाब ओढ़े रहे !
उसके बाद इन बड़े बड़ों ने इस्लाम पर क़ब्ज़ा कर लिया और सारा जोर लगा दिया कि अली
और उनके वंशज सत्ता पर न आने पाएं I
'ला इलाहा इल अल्लाह और मुहम्मदुन रसूल अल्लाह' का झंडा ले कर दुनिया जीतने और लूटने लगे और एक
कट्टर इस्लाम स्थापित किया I तीसरे खलीफा जब अपनों को हुकूमत का लाभ देने लगे तो
उनके खिलाफ मदीने में भीड़ इकट्ठे हुयी और उन्हें कत्ल किया गया और कोई रास्ता नहीं
निकले तो वहाँ के लोगों ने अली पर जोर डाला कि वह खलीफा बन जाएँ - वह बने पर यह
भला बड़ों बड़ों को कहाँ कुबूल था - उन पर क़त्ले उस्मान का इलज़ाम लगा कर उनसे चौथी
मोहतरम खातून ने जंग छेड़ दी I
फिर सीरिया के गवर्नर ने बगावत की और उसके बाद एक बागी ग्रुप ने अली को मस्जिद
में सिजदे में गर्दन पर वार किया I
उनके बड़े बेटे को खलीफा मानने को लोग - ज़ाहिर है बड़ों के उचकाने पर राज़ी नहीं
हुए और मुआविया खलीफा हो गए I मुआविया ने जो भी ज़ुल्म और दमन किया उसके बाद उसका
बेटा यजीद खलीफा हुआ और कर्बला में उसने अली के छोटे बेटे हुसैन और उनके साथियों
को शहीद करवाया औरतों को गिरफ्तार कराया I
यह है सुन्नियों का इस्लाम - हिंसा और दमन से समझौता ! शिया तो पहले तीन
खलीफाओं को ही गलत कहते हैं और वे गलत थे ही उन्होंने ने ही हिंसा और दमन का
इस्लाम बनाया और सुन्नी आलिम यह चाहता है कि मुआविया को बर हक खलीफा माना जाए और
यज़ीद को बर हक़ खलीफा माना जाए और हुसैन को बाग़ी करार दिया जाए !
आम मुसलमान - सुन्नी मुसलमान हुकूमत के आगे सर झुकाता रहा है पर यजीद की लाइन
के खलीफाओं के ज़ुल्म और अय्याशी से एक बार खड़ा हुआ ( और धोखा भी खाया ) जब अब्बास
( हजरत मुहम्मद के चचा) के वंशजों ने उनसे कहा हमारा साथ दो हम अली के वंशजों को
खलीफा बनायेंगे - लोगों ने साथ दिया मौजूदा खलीफा के वंश को कत्ल किया गया और
अब्बासी खुद खलीफा बन गए और हुकूमत बनाए रखने के लिए उन्होंने एक बहुत बड़ा इज्मा
किया जिसमें यह तये किया गया कि पहले 100 वर्षों में उम्मत ने जो कुछ किया वही हक
है ! यानी अली का खलीफा न बन पाना, प्रथम तीन खलीफा का खलीफा बनना हक है , मुआविया
हक हैं , यजीद हक पर है ! इसे कहते हैं - अहले सुन्नत अल जमाअत !
तो कर लो शिया सुन्नी इत्तेहाद ! पढ़ लो पूरा इत्तिहास !
जब इंसान ज़ुल्म और दमन को हक मान लेता है तो उसी रास्ते पर चलता है इसलिए अहले
सुन्नत अल जमाअत वह ब्रीडिंग ग्राउंड है जिससे बार बार आतंकवादी गुट निकलते रहेंगे
और अब ईरान की सरपरस्ती में शिया भी उसी रास्ते पर जाने को हैं !
अब भी वक़्त है मानवता और अहिंसा को सच्चा इस्लाम मान लीजिये और शिया सुन्नी इत्तेहाद नहीं हिन्दू, सिख, बौध
इसाई से भी इत्तेहाद की बात करिए !
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