आज की दुनिया में धर्म का झंडा ले कर मत खड़े होइए- न्याय स्थापित कीजिये !



आज की दुनिया में धर्म का झंडा ले कर मत खड़े होइए- न्याय स्थापित कीजिये !
धर्म क्यों आये ? धर्म संस्थापक क्या चाहता था और उसके बाद उसके मानने वालों ने कैसे धर्म का दुरूपयोग किया इसको समझने की ज़रुरत है I
10000 वर्ष पूर्व कृषि के आरम्भ के साथ हमारी सभ्यता का उदय हुआ - फिर उद्योग धंधे शुरू हुए व्यापार शुरू हुए नगर बने और राज्य स्थापित किये गए - सब कुछ सब के लिए था लेकिन  धीरे धीरे राज्य, धर्म सत्ता और व्यापारी वर्ग एक साथ मिल गए और आम लोगों को छोटा और कमज़ोर बना दिया - उन्हें जातियों में बाँट दिया या धर्म के नाम पर लड़ा दिया - उस समय धर्म पुजारी वर्ग के हाथ में था - भारत में भी शैव और वैष्णव मत में लोगों को बाँट कर लड़ाया जाता रहा है I
यह बात पूरी तरह समझ में आ जानी चाहिए कि आम लोगों को धनीवर्ग सत्ता वर्ग और धर्म के ठेकेदार लड़ाते रहे हैं I आज स्थिति सब से खराब है जनता द्वारा जनता के हित में चुने जाने वाले लोग जनता से गद्दारी कर के पूंजीपतियों उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाते हैं और जनता को मूर्ख बना रहे हैं I भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में संघी और जमाती आम लोगों को कट्टर और उग्र बना रहे हैं बेगुनाहों पर हमले करवा रहे हैं ताकि धनि वर्ग सत्ता वर्ग ऐश करता रहे !
लगभग 5000 वर्ष पूर्व आम लोगों को अन्याय और अत्याचार से बचाने के लिए समय समय पर युग पुरुष खड़े होते रहे हैं : भारत में बुद्ध और महावीर ने सत्कर्म और अहिंसा का पाठ पढ़ाया I
मिडिल ईस्ट में Moses और Jesus ने अपने अंदाज़ में शिक्षा दी और 1400 वर्ष पूर्व मुहम्मद साहब ने 'दुनिया के सारे इंसान एक माँ बाप की औलाद हैं' का सबक दिया और अपने समय की अमानवीय हिंसक रस्म बेटी को जिंदा दफन करने को खत्म किया I
लेकिन सारे धर्म इसलिए असफल हो गए क्योंकि उनके मानने वालों में फिर सत्ता वर्ग और धनी वर्ग और रब्बी, पादरी और क़ाज़ी मिल गए और आम लोगों को धर्मांध बना कर फिर से ऐश की ज़िन्दगी जीना शुरू कर दिया I
आज ज़रुरत है भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शिक्षित लोग खड़े हों एक खुले दिमाग का संगठन बनाएं और सत्ता अपने हाथ में लें और
1 देश को विज्ञान और तर्क के मार्ग पर चलायें
2 धर्मान्धता, कट्टरवाद, सम्प्रदायिकता और जातिवाद को समाप्त करें
3 अपराधियों (भ्रष्टाचारी भी अपराधी है) पहचानें, गिरफ्तार करें और जेल में बंद करें चाहे अब तक कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न रहा हो या कितना ही धनी क्यों न हो !         

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