इस्लाम की सही समझ कैसे प्राप्त करें ?
इस्लाम की सही समझ कैसे प्राप्त करें ?
सभी शिक्षित भारतवासी जिन्हें इस विषय में रूचि
है वे चाहे अपने को हिन्दू कहने वाले लोग हों या अपने को मुसलमान समझने वाले लोग
हों उनको यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इन 1400 वर्षों में खलीफाओं, मौलवियों और
मुस्लिम स्कालरों ने इस्लाम के नाम का बहुत दुरूपयोग किया है - आम लोगों का दिमाग
बंद करने में और औरतों को परदे में बंद कर के सिर्फ निकाह और तलाक़ की वस्तु बनाने
में I
अगर सही इस्लाम समझना है तो पहले यह समझ लें कि
मक्का में हिजरत के पूर्व के 11 वर्षों में 86 सूरे अवतरित हुए थे जो आम बुलावा
हैं अल्लाह पर ईमान लाने के लिए बुरे कामों से बचने और अच्छे काम करने के लिए I
हिजरत के बाद मदीने में 10 वर्षों में 28 सूरे
उतरे थे जिनमें इस्लाम के मुख्य आदेश हैं
I
वैसे तो पूरा कुरान वास्तविक क्रम में पढ़ने की
ज़रुरत है - कुरान में सूरे अपने वास्तविक क्रम में नहीं हैं I सही क्रम आप को
खोजना पड़ेगा - कुछ क़ुरानों में ऊपर बांयी ओर सूरे के आरम्भ में अवतरण का क्रम दिया
रहता है - इस क्रम संख्या के अनुसार 87 से 114 सूरों को पढ़ें और उस वक़्त की सही
परिस्थितियों को समझें I
मदीने के 28 सूरों को उनके वास्तविक क्रम में
पढ़ने की ज़रुरत है I
जब इन सूरों को मतलब समझ कर पढ़ा जाएगा तो तीन
तरह के संघर्ष आप को मालूम पड़ेंगे :
1 मदीने में रहने वाले यहूदियों और ईसाइयों से
वाद-विवाद - लेकिन यह समस्या अपने समय के साथ समाप्त हो गयी और आज की दुनिया में
तीनों धर्म अपने अपने स्थान पर स्थापित हैं I
2 वे मुसलमान जो नबी को नबी मानते थे पर उनकी
सोच समझ और कर्म में जो गलतियां थी वे आप को मालूम पड़ेंगी और कैसे उनका सुधार हुआ
I
3 मुसलामानों में शामिल वे लोग जो मुंह से तो
मुसलमान हो गए थे पर यह दिखावा था - ऐसों को मुनाफ़िक़ ( जिनके मन में रोग है ) कहा
गया I
तीसरे वर्ग का सुधार होने नहीं पाया और मुहम्मद
स० की वफात हो गयी - सूरों का अवतरण समाप्त हो गया I
तीसरे वर्ग का ही इस्लाम पर क़ब्ज़ा हो गया जिसने
इस्लाम को आम इंसानों को दिमाग बंद करने के लिए इस्तेमाल किया और आस पास के
मुल्कों पर हमला कर के जीतने वहाँ से दौलत , औरतें , गुलाम , कनीज़ें हासिल करने
में इस्तेमाल किया I
दुनिया में दूसरे मजहब और मुल्क अपनी अपनी
हिफाज़त में खड़े हो गए - मुनाफिकों का
इस्लाम मिडिल ईस्ट में सिमट कर रह गया और गरीबी और पिछड़ेपन में वे लोग फंस गए I
1940 के आस पास तेल की खोज हो गयी मिडिल ईस्ट
दौलत मंद हो गया और मुनाफिकों का इस्लाम फिर से ताक़तवर हो गया और पूरी दुनिया की
सुरक्षा और शान्ति के लिए खतरा बन गया I
अगर मुसलमान सच्चे इस्लाम पर आ जाएँ तो दुनिया
में अमन स्थापित हो जाएगा I
सच्चा इस्लाम क्या है ?
मुहम्मद स० के जीवन काल में जो मदीने में इस्लाम
था उस पर अगर सुन्नी और शिया दोनों आ जाएँ तो उनका आपस में टकराव भी बंद हो जाए और
दुनिया में भी अमन हो जाए I
मुहम्मद स० ने अपने जीवनकाल में अच्छे इखलाक का
प्रदर्शन किया था - उनके जो करीबी असहाब थे जो पहले तीन खलीफा हैं और दूसरे बुलंद
मर्तबा असहाब और मुहम्मद स० की पत्नियों का भी एहतराम था पर मुहम्मद स० की बेटी फातिमा अ० और बेटी के शौहर अली अ० और उनके
दोनों बेटों हसन अ० और हुसैन अ० से मुहब्बत हर उस वक़्त के मुसलमान को थी - आज अगर
सारे मुसलमान मदीने के इस इस्लाम पर पलट आयें तो मुसलामानों के बीच अमन हो जाए I
आज की आधुनिक शिक्षित मुस्लिम पीढ़ी को विज्ञान
के सत्य को अपनाना चाहिए और इस प्रकार कौम की हालत बहतर करनी चाहिए जिसे मुनाफ़िक़
इस्लाम वाले मौलवियों और स्कालरों ने बंद दिमाग का बना दिया है I
आज सऊदी अरब और ईरान में जो इस्लाम है अगर पूरी
दुनिया में वही इस्लाम थोप दिया जाए तो यह मानव जाति के हित में होगा ?
शिक्षित पीढ़ी को इस्लाम खोजना है तो उसका इस्लाम
उनमें नहीं विज्ञान और यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स 1948 में है और इस
समझ में है कि हर एक को अपने हिसाब से पूजा या नमाज़ , व्रत या रोज़ा , तीर्थ या हज
जियारत और दान या ज़कात का हक है और किसी को दूसरे के मामलात में न हस्तक्षेप का हक
है और न किसी को अपने काम से दूसरों को डिस्टर्ब करने का हक है I
ASTHA -
Association of Social Thinkers and Activists - आप manesiro@gmail.com पर ई मेल
करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण Year Book 2018 का ड्राफ्ट प्रेषित किया जाएगा -
आप अपने बहुमूल्य विचार इसमें अंत में अंकित कर मुझे पुनर्प्रेषित करें - सभी के
विचार संकलित कर के वर्ष 2018 जनवरी मास
के अंत तक इस पुस्तक को प्रकाशित किया जाएगा I इस प्रकार वर्ष प्रति वर्ष यह क्रम
चलता रहेगा I
ASTHA एक
ऑनलाइन संगठन है जो नि:शुल्क है और कभी
कोई फीस नहीं लेगा - सिर्फ सत्य और ज्ञान की शक्ति से आम नागरिकों को जागृत कर के
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को समझें और आगे बढ़ाएं - इन पोस्टों को
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