मुसलामानों की धर्मान्धता और कट्टरवाद : कारण और उसका धार्मिक अध्यात्मिक उपचार

मुसलामानों की धर्मान्धता और कट्टरवाद : कारण और उसका धार्मिक अध्यात्मिक उपचार
आज पूरे विश्व में और भारत में जो अशांति है उसका मुख्य कारण मुसलामानों की धर्मान्धता और कट्टरवाद है जिससे आतंकवाद जन्म लेता है और इस कारण दुनिया और भारत के अन्य लोग मुसलामानों से नफरत करते हैं और सशंकित रहते हैं और अमेरिका और भारत जैसे प्रजातांत्रिक देशों में वे लोग सत्ता के शिखर पर बैठेंगे जो मुसलामानों और इस्लाम से खुल्लम खुल्ला दुश्मनी प्रदर्शित करेंगे - चाहे जनता उन्हें वोट दे या समर्थ लोग चुनाव में धांधली करा कर ऐसे लोगों को सत्तारूढ़ कराएं I 
मुसलमान धर्मांध और कट्टर क्यों हैं  ? बचपन से उन्हें यह सिखाया जाता है कि इस्लाम अल्लाह का आखिरी दीन है यही एक सच्चा दीन है , कुरान अल्लाह की किताब है और हमारे नबी अल्लाह के आखिरी और सबसे अफज़ल नबी हैं I जो मुसलमान नहीं है वे या तो काफिर हैं - जो अल्लाह को नहीं मानते या वे मुशरिक हैं जो अल्लाह के समकक्ष अन्य किसी और की भी इबादत करते हैं I
लेकिन बात सिर्फ यहीं पर नहीं ठहरती - किसी का काफ़िर होना यदि वह ईमान लाने से इनकार करे उसे वाजिबुल क़त्ल भी बनाता है I इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि किसी भी देश में देश द्रोही मृत्यु दंड का भागी माना जाता है या जैसे कहीं कभी नाज़ी और कम्युनिस्ट भी इसी श्रेणी में आ जाते हैं I
पर बात यहाँ पर भी ख़त्म नहीं होती - बहाई और कादियानी तबकों को तो सभी मुसलमान काफिर मुशरिक मानते हैं उन्हें मुस्लिम नहीं मानते - सुन्नी मुसलमान शियों को काफिर मानते हैं और सुन्नियों में ही देओबंदी बरेलवी मुसलामानों को काफिर मानते हैं I
दायेश जैसे संगठन सिर्फ अपने को सच्चा मुसलमान मानते हैं और किसी को क़त्ल करने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती है I
आतंकवादी हमले फिदायीन हमले में कौन मारा गया इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है क्योंकि सिर्फ वे स्वयम सच्चे हैं और जो आतंकी मरा वह तो शहीद है सीधे 72 हूरों का हमनशीं हो गया !
इस मानसिक उन्माद का क्या उपचार है ? यह मानसिक उन्माद लगातार मौलवियों द्वारा मुस्लिम स्कालरों द्वारा और मुस्लिम ब्रादरहुड जैसे शिक्षित संगठन द्वारा जाने अनजाने फैलाया जा रहा है I
सत्य यह है कि धर्मांध और कट्टर मुसलमान वास्तव में चौथा तबका जिसे कुरान मुनाफ़िक़ कहता है उससे हैं और यह तबका इस्लाम फैलने के बाद मुसलामानों में निकला और सब से ताक़तवर हो गया I
धर्मांध और कट्टर मुसलमान वे मुसलमान हैं जो अल्लाह और अपने नबी के रास्ते पर नहीं हैं !
अगर यह बात समझ में आ जाए तो यह मुसलमान धर्मान्धता और कट्टरवाद छोड़ कर सीधे सच्चे मुसलमान हो जायेंगे I
इनका इलाज इस तर्क से शुरू होता है कि मान लो आप खुद अल्लाह के नबी हैं और अल्लाह का फ़रिश्ता आप के पास आता है तो क्या अब आप धर्मांध और कट्टर रहोगे या आप को सारे इंसानों से हमदर्दी और मुहब्बत पैदा हो जाएगी ? क्या आप के नबी धर्मांध और कट्टर थे या वे इंसानियत के सब से ऊंचे स्तर पर थे और उन्हें सारे इंसानों से मुहब्बत थी ?
इससे स्पष्ट हो गया कि धर्मांध कट्टर मुसलमान अपने नबी के रास्ते पर नहीं हैं और अल्लाह से दूर हैं !
हमें  अपने में हर तरफ हर एक में अल्लाह के वजूद का एहसास होना चाहिए I हर इंसान अल्लाह का नबी है और हर एक के पास फ़रिश्ते आते हैं - नबा का मतलब होता है खबर देना तो हर बच्चा पैदा होते ही अल्लाह की खबर देता है और हर नेक मर्द औरत अल्लाह की खबर देता है - सूरज चाँद तारे सब अल्लाह की खबर देते हैं I
हर इंसान के पास दो फ़रिश्ते तो हैं जो उसके आमाल दर्ज करते हैं और मरते वक़्त मौत का फ़रिश्ता तो आएगा ही और हो सकता है ज़िन्दगी में कितने फ़रिश्ते किसी और सूरत में आते होंगे I
विज्ञान भी अल्लाह का दिया इल्म है और विज्ञान बताता है : 
इस सृष्टि का आरंभ 13.5 अरब वर्ष पूर्व बिग बैंग से हुआ था
सौर मंडल और पृथ्वी का जन्म 6 अरब वर्ष पूर्व हुआ था
धरती पर 3 लाख पूर्व के नारी कंकाल "लूसी" से हम सब जेनेटिक लिंक्ड हैं
आधुनिक मानव 2 लाख पूर्व विकसित हुआ
10000 वर्ष पूर्व से सभ्यता का विकास  
अब सूरा दहर की पहली आयत पढ़िए : बेशक इंसान पर ऐसा वक़्त गुज़रा है जब वह कोई काबिले ज़िक्र चीज़ नहीं था ! क्या यह इवोलुश्न की ओर इशारा नहीं हो सकता ?
सूरा वाकिया की आयत 75 देखिये : मैं तारों की पोजीशन की कसम खाता हूँ ! आकाश में जो तारे हम देखते है वे उस स्थान पर नहीं हैं जहां हम हैं देखते हैं - कोई वहाँ कुछ 100 वर्ष पूर्व था कोई वहाँ कुछ 1000 वर्ष पूर्व था और कुछ लाखों वर्ष पूर्व था और कुछ करोड़ों अरबों वर्ष पूर्व और करोड़ों अरबों तारों का प्रकाश अभी हम तक पहुंचा भी नहीं !
तो यह तारे कहाँ स्थित हैं ? यदि हर तारे की सही दूरी सही वेग किसी अति शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर में फीड की जाए तो इन तारों की सही पोजीशन ज्ञात हो पाएगी !
इसलिए आधुनिक शिक्षित मुस्लिम मित्रों धर्मान्धता कट्टरवाद के खिलाफ खड़े होइए इंसानियत और मुहब्बत के रास्ते पर चलिए और विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में बहुत बहुत आगे बढ़िये तभी आप निफाक छोड़ कर सच्चे इंसान सच्चे मुसलमान बन सकेंगे और दुनिया का कोई भी इंसान चाहे जो धर्म हो या नास्तिक हो सच्चा मुसलमान है अगर वह इंसानियत और मुहब्बत के रास्ते पर है - अल्लाह उसे अपना रास्ता खुद दिखा देगा !
ASTHA - Association of Social Thinkers and Activists - आप manesiro@gmail.com पर ई मेल करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण Year Book 2018 का ड्राफ्ट प्रेषित किया जाएगा - आप अपने बहुमूल्य विचार इसमें अंत में अंकित कर मुझे पुनर्प्रेषित करें - सभी के विचार संकलित कर के  वर्ष 2018 जनवरी मास के अंत तक इस पुस्तक को प्रकाशित किया जाएगा I इस प्रकार वर्ष प्रति वर्ष यह क्रम चलता रहेगा I
ASTHA एक ऑनलाइन संगठन है जो नि:शुल्क  है और कभी कोई फीस नहीं लेगा - सिर्फ सत्य और ज्ञान की शक्ति से आम नागरिकों को जागृत कर के देश और दुनिया बदल देगा - आप केवल ईमेल द्वारा जुड़े रहें और अपनों को जोड़ें I इन विचारों को समझें  और आगे बढ़ाएं - इन पोस्टों को शेयर करें I

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