झूठ , धोखा गद्दारी का इतिहास 1
कभी सोचिये कि
मुट्ठी भर परिवार अरबपति खरबपति कैसे बने तो आप को झूठ धोखा और गद्दारी का इतिहास
नज़र आएगा I
1 इंसान धरती
पर evolution से आया है
2 हज़ारों वर्ष
जंगल में रहा यहाँ कबीले बनाए पशु पालन किया
3 सैकड़ों वर्ष
यह कबीले अपने पशुओं और सोना चांदी और जेवरों के साथ खानाबदोश रहे
4 फिर नदियों
किनारे बसते गए गाँव बनाए खेती की यहाँ
मंदिर बनाए सोने चांदी से देवी देवता बनाए उन्हें जेवर चढ़ाए
5 कारीगरी और
व्यापार विकसित हुआ नगर बसे - व्यापारी और राजा दो परिवार ऊपर उठ कर आये और एक
दूसरे को फायेदा पहुंचाते रहे आम लोगों का नुकसान होता गया पर फिर भी इतना धोखा
गद्दारी नहीं हुयी
6 महानगर बने
साम्राज्य बने फिर भी इतना बड़ा धोखा और गद्दारी नहीं हुयी
7 विज्ञान और
टेक्नोलॉजी का विकास हुआ - साम्राज्य बिखर गए - राष्ट्र बने और प्रजातंत्र स्थापित
हुए और धोखे और गद्दारी का नया इतिहास शुरू हुआ
8 सत्ता के तीन
अंग हुए - विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका
9 व्यापारी
सत्तारूढ़ राजनीतिज्ञों के करीब आये उन्हें व्यक्तिगत लाभ पहुंचाया और राजनीतिज्ञों
ने व्यापारी को हर तरह का अनुचित लाभ जनता की कीमत पर पहुंचाया - जनता का पैसा ऋण
के रूप में दिया - व्यापारी इसको ले कर पूंजीपति बना - सरकार ने ज़मीन दी ऋण दिया
पूंजीपति उद्योगपति बना
10 राजनीतिज्ञ
तो अनुचित लाभ ले कर मुंह काला कर के हटते रहे पर पूंजीपति उद्योगपति परिवार अपनी
निरंतरता बनाए रहे - सत्ता में जो भी आये अब उसे खरीदने की ताक़त आ चुकी थी - जो
मदद राजनीतिज्ञ नहीं देगा वह जज देगा और बाक़ी लाभ उच्च अधिकारी निचले कर्मचारी
देंगे - ज़मीन भी मुफ्त बिजली भी मुफ्त - चुनाव में पैसा लगायेंगे - जो भी जीत कर
आएगा है तो उनका गुलाम
11 जनता द्वारा
चुनी सरकार अब सिर्फ पूंजीपतियों की रखैल ही बन कर रह सकती है - कोई आँख मिलाये तो
सरकार गिर जायेगी दूसरी सरकार रखैल बनने को तैयार है तो
12 अगर कोई एक
राष्ट्र नेता उभरेगा तो अपने ही निवास स्थान में अपने ही सिक्यूरिटी गार्ड द्वारा
भून दिया जाएगा और कहा जाएगा अमुक आतंकवादी संगठन ने यह घृणित काम किया I हम भारतवासी जो जानते हैं यह संसार यह जीवन कुछ
नहीं है - पानी कर बुदबुदा अस मानस की जात
और जो जानते हैं रुपया पैसा कुछ नहीं सिर्फ हाथों की मैल है - यही विश्व की
अगुवाई कर के एक नए विश्व की रचना करेंगे I
हम सभी शिक्षित स्त्री पुरुष एक मज़बूत संगठन बनाएं
- मैंने इसका नाम सोचा है ASTHA - Association of Social Thinkers and Activists -
आप manesiro@gmail.com पर ई मेल करें - आपको सामाजिक पुनर्निर्माण Year Book 2017
का ड्राफ्ट प्रेषित किया जाएगा - आप अपने बहुमूल्य विचार इसमें अंत में अंकित कर
मुझे पुनर्प्रेषित करें - सभी के विचार संकलित कर के वर्ष 2018 मार्च में इस पुस्तक को प्रकाशित किया
जाएगा I
ASTHA एक
ऑनलाइन संगठन है जो नि:शुल्क है और कभी
कोई फीस नहीं लेगा - सिर्फ सत्य और ज्ञान की शक्ति से आम नागरिकों को जागृत कर के
देश और दुनिया बदल देगा - आप केवल ईमेल द्वारा जुड़े रहें और अपनों को जोड़ें I इन विचारों
को समझें और आगे बढ़ाएं - इन पोस्टों को
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